भोपाल/डिंडोरी। मध्यप्रदेश में बांध परियोजनाओं, गलियारा प्रोजेक्ट, राष्ट्रीय उद्यान विस्तार, जमीनों की कथित फर्जी खरीद-फरोख्त और जबरन विस्थापन को लेकर आदिवासी समुदाय में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। प्रदेश के कई आदिवासी बहुल जिलों में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि विकास परियोजनाओं के नाम पर उनके जल, जंगल और जमीन पर लगातार हमला किया जा रहा है। आदिवासी समाज के लोगों का कहना है कि गांवों में बुलडोजर कार्रवाई, प्रशासनिक दबाव, शोषण, भेदभाव और प्रताड़ना जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे ट्रायबल समाज खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। इसी बीच प्रदेश के 47 आदिवासी विधायकों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने कहा है कि यदि सभी ट्रायबल विधायक वास्तव में आदिवासी हितैषी हैं, तो उन्हें जबरन विस्थापन और अत्याचार के खिलाफ खुलकर आवाज उठानी चाहिए तथा सरकार पर दबाव बनाना चाहिए, आक्रोशित लोगों ने कहा कि यदि जनप्रतिनिधि आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा नहीं कर पा रहे हैं, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। विरोध कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि कई जनप्रतिनिधि आदिवासी समाज की समस्याओं को नजरअंदाज कर केवल सत्ता और प्रभावशाली वर्गों के हित में कार्य कर रहे हैं। प्रदेश के कई हिस्सों में आदिवासी संगठनों द्वारा आंदोलन और विरोध प्रदर्शन की तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि विस्थापन, अत्याचार और जमीन संबंधी विवादों पर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।







