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गोंडवाना समग्र विकास क्रांति आंदोलन को जीने वाले एक ऐसा नाम जिसने गोंडवाना आंदोलन को दिशा दी

आलेख दिनेश शाह उइके की कलम से……….

कुछ व्यक्तित्व केवल अपना जीवन नहीं जीते, बल्कि अपने विचारों, कर्मों और समर्पण से आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्ग प्रशस्त कर जाते हैं। ऐसे ही व्यक्तित्व थे ग्राम बोड़तरा निवासी *तिरु. माधो सिंह मार्को जी*।

उन्होंने अपने जीवन की शुरुआत एक शिक्षक के रूप में की और बाद में प्रधान पाठक का दायित्व भी निभाया। लेकिन उनका जीवन केवल सरकारी सेवा तक सीमित नहीं रहा। *गोंडवाना रत्न दादा हीरा सिंह मरकाम जी* के विचारों और वचनों को आत्मसात करते हुए उन्होंने नौकरी से आगे बढ़कर समाज निर्माण का संकल्प लिया। इसी संकल्प के साथ उन्होंने अपने घर से *गोंडवाना शाला त्यागी कृषि विद्यालय* की स्थापना की और लगभग दस वर्षों तक निरंतर उसका संचालन किया।

इस विद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने वाले अनेक विद्यार्थियों ने उच्च शिक्षा हासिल की। कोई वकालत के क्षेत्र में आगे बढ़ा, तो किसी ने स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। शिक्षा के साथ-साथ उन्होंने युवाओं के कौशल विकास और सामाजिक चेतना को भी मजबूत करने का कार्य किया। यह उनके दूरदर्शी नेतृत्व और समर्पण का जीवंत प्रमाण है।

उनकी कर्मनिष्ठा और संगठन क्षमता को देखते हुए *दादा हीरा सिंह मरकाम जी* ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर दायित्व सौंपा। वे राष्ट्रीय संगठन सचिव बने और “वन टू टेन” अभियान सहित अनेक सामाजिक कार्यों के माध्यम से गोंडवाना समाज को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वे केवल एक संगठनकर्ता नहीं थे, बल्कि समाज की पीड़ा को अपने हृदय में महसूस करने वाले चिंतक थे। समाज की वर्तमान स्थिति उन्हें हमेशा बेचैन करती थी। पेनवासी होने से मात्र दो दिन पहले उन्होंने मुझसे लगभग 35 मिनट तक मोबाइल पर बातचीत की। उनकी आवाज़ में समाज के प्रति चिंता स्पष्ट झलक रही थी। उन्होंने कहा—

“दिनेश, इस गोंडवाना समाज का क्या होगा? समाज इतने हिस्सों में क्यों बँटा हुआ है? आखिर यह समाज एक कब होगा? हमारी बहन-बेटियों को उचित मान-सम्मान कब मिलेगा? लोग दादा जी की विचारधारा को कब आत्मसात करेंगे? इन सब बातों को सोचता हूँ तो मन बहुत व्याकुल हो जाता है। मैं बहुत जल्द घर आ रहा हूँ, फिर हम साथ बैठकर इस पर विस्तृत योजना बनाएँगे।”

आज भी उनके ये शब्द मेरे कानों में गूंजते हैं।

किन्तु नियति को कुछ और ही मंजूर था। 8 जुलाई को बी. एल. जगत जी द्वारा सूचना मिली कि ग्राम बोड़तरा निवासी तिरु. माधो सिंह मार्को जी लिंगोवासी हो गए हैं। यह समाचार सुनकर मैं स्तब्ध रह गया। ऐसा लगा मानो गोंडवाना समाज ने अपना एक सच्चा मार्गदर्शक, एक समर्पित चिंतक और एक कर्मयोगी खो दिया हो।

*तिरु. माधो सिंह मार्को जी* का जीवन हमें यह संदेश देता है कि सच्चा समाजसेवी वही है जो स्वयं से पहले समाज के भविष्य की चिंता करे। उनका योगदान, उनके विचार और उनका संघर्ष सदैव गोंडवाना समाज को प्रेरित करता रहेगा।

विनम्र पेनांजलि

“महान व्यक्तित्व शरीर से विदा हो जाते हैं, लेकिन उनके विचार, उनके संस्कार और उनका संघर्ष सदैव अमर रहते हैं। तिरु. माधो सिंह मार्को जी का जीवन और उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।”

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