पाली / छत्तीसगढ़ सरकार अपने साल भर की लेखा-जोखा की भौतिक सत्यापन करने एवं भविष्य की राजनीतिक ताना-बाना बुनने के लिए जनता के बीच जाकर सुशासन तिहार मना रहा है लेकिन इस सुशासन तिहार से शासन की कथनी और करनी का परिणाम सामने आ रहा है।
26 मई को पाली ब्लॉक के ग्राम पंचायत निरधी में सुशासन तिहार का आयोजन किया गया है। ग्राम पंचायत निरधी के आश्रित मोहल्ला बरहापारा में निस्तारी के लिए महज एक तालाब है वह भी निजी है जो भीषण गर्मी में सुखने की कगार पर पहुंच गया है। एक प्रकार से ग्रामीण कीचड़ भरी गंदे पानी में नहाने के लिए लाचार हैं। लगभग 200 आबादी वाले इस मोहल्ले में पेयजल की इतनी समस्या है कि पूरे मोहल्ला में तीन हैंड पंप है। जिसमें से एक हैंड पंप में सबमर्सिबल है जो पर्याप्त पानी पूर्ति नहीं हो पाती।
छत्तीसगढ़ शासन की इस सुशासन तिहार में ग्राम पंचायत निरधी , कर्रा नवापारा, कोडार, पोंडी, पोलमी, सिल्ली, बतरा, परसदा एवं शिवपुर के आम नागरिक उपस्थित होकर अपनी समस्याओं का निदान पाने के लिए प्रयास करेंगे । क्या वह प्रयास में सफल होंगे क्योंकि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 2025 में भी सुशासन तिहार मनाया गया था जिसमें ग्रामीण क्षेत्र की 90% आवेदन का निराकरण लंबित है जो आज तक यक्ष प्रश्न बना हुआ है ।
इस सुशासन तिहार से क्या अघोषित विद्युत कटौती से मिलेगी छुटकारा-
पूरे देश को बिजली आपूर्ति करने वाला कोरबा जिला के अधिकांश क्षेत्र अघोषित विद्युत कटौती से त्रस्त है। हम ग्रामीण क्षेत्र की बात करें तो ऐसा कोई दिन नहीं की अघोषित विद्युत कटौती नहीं होता होगा । कारण जो भी हो विद्युत विभाग की व्यवस्था चरमराया हुआ है । विस्तारित एल्यूमीनियम कमजोर हो जाने के कारण जरा सा हवा तूफान की दबाव में टूट जाता है नए सिरे से विस्तारित एल्यूमीनियम के साथ एबी स्विच को बदलने की आवश्यकता है।
क्षेत्र की महत्वाकांक्षा मांग कन्या हायर सेकेंडरी विद्यालय परसदा का सपना होगा पूरा ?
छत्तीसगढ़ सरकार और केंद्र सरकार बालिका शिक्षा को महत्व देने के लिए विभिन्न योजना संचालित कर रखा है लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि क्षेत्र की जनता लगातार शासन प्रशासन से ग्राम पंचायत परसदा में कन्या हायर सेकेंडरी विद्यालय की मांग विगत कई वर्षों से कर रहे हैं लेकिन शासन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। क्षेत्रीय विधायक मरकाम द्वारा विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री से मुलाकात कर ग्राम पंचायत परसदा में कन्या हायर सेकेंडरी खोलने का मांग किया गया था जिसमें मुख्यमंत्री द्वारा आसपास किया गया था कि शासन की योजना अनुसार बजट पर उचित कार्यवाही करते हुए स्वीकृति प्रदान किया जाएगा लेकिन वह आश्वासन पर पंचायत वासियों के लिए सिर्फ झुनझुना रहा। अब पुनः सुशासन तिहार में मांग करने का अवसर प्राप्त हुआ है देखना होगा सुशासन तिहार प्रभारी द्वारा इस पर क्या कार्यवाही करते हैं? या फिर कह सकते हैं क्षेत्र की जनता अपनी पुरानी मांग को दोहराते हैं कि नहीं?
सिल्ली मोड में पुलिस चौकी की होगा स्थापना ?
कोरबा जिला की अंतिम छोर में बसा जनपद पंचायत पाली मुख्यालय से 24 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत शिवपुर जो जिसे सिल्ली मोड के नाम से जाना जाता है इस चौक के आसपास लगातार अप्रिय घटना घटती रहती है क्योंकि यह क्षेत्र हमेशा सुनसान रहता है। अनैतिक कृत्य करने वाले लोग फायदा उठाते हैं कई बार लावारिस लाश मिल चुका है।जिसके कारण स्थानीय जनप्रतिनिधि द्वारा लगातार पुलिस चौकी या बैरियर की स्थापना की मांग कर रहे हैं लेकिन क्षेत्र की दुर्भाग्य की बात है कि जिला बॉर्डर होने के बावजूद भी पुलिस चौकी या बैरियर की स्थापना नहीं हो पा रहा है , क्या इस सुशासन तिहार में क्षेत्र की इस समस्या को क्षेत्रीय जन प्रतिनिधि लोग शासन प्रशासन का ध्यान आकर्षित करेंगे?
ग्रामीण प्रतिभा को निखारने के लिए खेल मैदान की सुविधा उपलब्ध कराएगी सरकार ?
केंद्र सरकार की योजना हो या फिर राज्य सरकार की अनेकों ऐसी योजना है जिसमें शारीरिक मापदंड की अनिवार्यता होता है और यह अनिवार्यता खेल की मैदान से होकर गुजरता है जिसमें अभ्यर्थी को विभिन्न प्रकार की शारीरिक योग्यता की परीक्षा पास करना होता है शारीरिक परीक्षा उन भारतीयों के लिए अनिवार्य है जैसे देश में पुलिस और सुरक्षा बल पुलिस आरक्षक,होमगार्ड , जेल प्रहरी वनरक्षक , सीआरपीएफ, बीएसएफ ,सीआईएफ, एसएससी जीडी ,अग्नि वीर , वन विभाग, नगर सैनिक, जैसे महत्वपूर्ण सेवा के लिए भर्ती प्रक्रिया में शारीरिक मापदंड की अनिवार्यता होता है जो देश की रीढ़ की हड्डी बनकर देश की सेवा करने में तत्पर तैयार है। क्या अपनी शारीरिक योग्यता स्थापित करने के लिए क्षेत्र की युवाओं को सर्व सुविधायुक्त खेल मैदान इस सुशासन तिहार के माध्यम से मिलेगा या फिर क्षेत्र की जन प्रतिनिधि द्वारा शासन प्रशासन का ध्यान आकर्षित करेगा?
वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत किए गए आवेदन जो ग्राम सभा से प्रस्तावित है क्या उनको मिलेगा वन अधिकार पत्रक…..
छत्तीसगढ़ के अधिकांश ग्राम पंचायत में वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत हितग्राहियों द्वारा आवेदन किया गया है और आवेदन की परिपालन में ग्राम सभा भी आयोजित किया जा चुका है लेकिन उच्च कार्यवाही के अभाव में पात्र हितग्राहियों को वन अधिकार पत्रक प्रदाय नहीं किया गया है आखिर क्यों? क्या सरकार की मंशा पात्र हितग्राहियों को वन अधिकार पत्रक देने का नहीं है या फिर राजनीतिक अवसर की तलाश में इंतजार में तो नहीं लगे हुए हैं। क्योंकि सत्ताधारी राजनीतिक दल हमेशा राजनीतिक अवसर की तलाश में लगा रहता है कि शासन की जो योजना है वह वोट बैंक की राजनीति में कैसे कन्वर्ट हो। यदि शासन प्रशासन वन अधिकार अधिनियम 2006 का पालन किया होता तो प्रदेश में एक भी प्रकरण लंबित नहीं रहता। जैसे विभिन्न अनुत्तरित सवालों भरा जवाब के इंतजार में सुशासन तिहार की आप सबको गाड़ा गाड़ा बधाई……..






