विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम ने दी बधाई एवं उज्जवल भविष्य की कामना के साथ हर संभव मदद करने का आश्वासन,
*पाली / तानाखार :-* छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के पाली-तानाखार विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम केराकछार की बेटी संजू देवी यादव ने एक बार फिर देश-प्रदेश का मान बढ़ाया है।
जापान में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला कबड्डी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। इस स्वर्णिम विजेता टीम की सदस्य केराकछार की लाडली संजू देवी यादव रही हैं।
संजू के स्वर्ण जीतते ही पूरे पाली-तानाखार क्षेत्र सहित पूरे छत्तीसगढ़ में खुशी की लहर दौड़ गई है। ग्रामीण अंचल की एक बेटी का एशिया स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर स्वर्ण जीतना, प्रदेश की बेटियों और युवा खिलाड़ियों के लिए बड़ी प्रेरणा है।
*विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम ने दी बधाई*
पाली-तानाखार विधायक *श्री तुलेश्वर सिंह मरकाम* ने संजू देवी यादव की इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए बधाई दी है।
उन्होंने अपने शुभकामना संदेश में कहा –

> “ग्राम केराकछार की बेटी, हमारी लाडली संजू देवी यादव ने अपने उत्कृष्ट खेल, कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प से जापान में आयोजित एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर न केवल तानाखार, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और देश को गौरवान्वित किया है। यह हम सभी के लिए गर्व का क्षण है। संजू की यह उपलब्धि हमारे आदिवासी अंचल की प्रतिभा को दर्शाती है। मैं लाडली संजू सहित पूरी भारतीय महिला कबड्डी टीम को इस स्वर्णिम सफलता की हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देता हूं।”
विधायक ने कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों को हर संभव मदद दे रही है और संजू जैसी बेटियां छत्तीसगढ़ की खेल प्रतिभा का नया चेहरा हैं।
संजू के गांव केराकछार सहित क्षेत्र और प्रदेश में भी जश्न का माहौल है। परिजनों और ग्रामवासियों ने मिठाइयां बांटकर खुशी मनाई।
तीन घंटे का सफर, सीमित साधन और बड़ा सपना… गरीबी और संघर्ष को हराकर संजू देवी ने कबड्डी में रचा इतिहास
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के छोटे से गांव केराकछार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय कबड्डी के मंच तक पहुंचने वाली संजू देवी की कहानी मेहनत, अनुशासन और लगातार संघर्ष की कहानी है। साधारण परिवार में पली-बढ़ीं संजू ने सीमित संसाधनों के बावजूद कबड्डी को अपना लक्ष्य बनाया और धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर से भारतीय टीम तक का सफर तय किया। 2025 में बांग्लादेश में आयोजित महिला कबड्डी विश्व कप में संजू देवी भारतीय टीम का हिस्सा रहीं। फाइनल में भारत ने चीनी ताइपे को 35-28 से हराकर खिताब जीता। इस मुकाबले में संजू ने अकेले 16 अंक हासिल किए। पूरे टूर्नामेंट में उनके प्रदर्शन के लिए उन्हें मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर यानी MVP चुना गया।

कोरबा के छोटे से गांव से शुरू हुआ सफर
संजू देवी का संबंध कोरबा जिले के केराकछार गांव से है। उनकी शुरुआती पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल में हुई। उन्होंने स्कूल के दिनों में ही कबड्डी खेलना शुरू किया और धीरे-धीरे इस खेल के प्रति उनका लगाव बढ़ता गया। उनका परिवार आर्थिक रूप से सामान्य परिस्थितियों में रहा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनके पिता खेती और दिहाड़ी मजदूरी से जुड़े रहे हैं। ऐसे माहौल में खेल के लिए जरूरी संसाधन जुटाना आसान नहीं था, लेकिन संजू ने परिस्थितियों को अपने रास्ते की बाधा नहीं बनने दिया।
रोज का लंबा सफर और कबड्डी का जुनून
संजू के शुरुआती दिनों में प्रशिक्षण के लिए गांव से कोरबा तक रोजाना लंबा सफर करना पड़ता था। इस सफर में करीब तीन घंटे तक का समय लगता था। इसके बावजूद अभ्यास जारी रहा। उनकी प्रतिभा पर शुरुआती दौर में कोरबा जिला कबड्डी संघ से जुड़े अनुज प्रताप सिंह की नजर पड़ी। उन्होंने संजू को शुरुआती प्रशिक्षण और आगे बढ़ने का अवसर दिया। बाद में संजू का चयन बिलासपुर के बहतराई स्थित बालिका आवासीय कबड्डी अकादमी में हुआ, जहां उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और खेल सुविधाएं मिलीं।
बहतराई अकादमी में तराशी गई प्रतिभा
बहतराई की बालिका आवासीय कबड्डी अकादमी संजू के खेल करियर में महत्वपूर्ण पड़ाव बनी। यहां उन्होंने कोच दिल कुमार राठौर के मार्गदर्शन में अपने खेल को निखारा। अकादमी में उन्हें नियमित प्रशिक्षण के साथ खेल से जुड़ी जरूरी सुविधाएं मिलीं। लगातार अभ्यास और प्रतियोगिताओं में भागीदारी से उनके खेल में निखार आता गया। गांव के स्तर से शुरू हुआ सफर धीरे-धीरे राज्य और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचने लगा।
यूनिवर्सिटी टूर्नामेंट से इंडिया कैंप तक
संजू ने बिलासपुर विश्वविद्यालय की ओर से ईस्ट जोन इंटर यूनिवर्सिटी और ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। इसके अलावा उन्होंने राज्य और राष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं में भी प्रदर्शन किया। 2024 में छत्तीसगढ़ कबड्डी संघ की चयन स्पर्धा में उनके प्रदर्शन के बाद उन्हें इंडिया कैंप के लिए चुना गया। वहां अच्छे प्रदर्शन के आधार पर उन्हें भारतीय टीम के लिए आगे के अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में मौका मिला। यही चरण उनके करियर में बड़ा मोड़ साबित हुआ। घरेलू प्रतियोगिताओं में लगातार प्रदर्शन के बाद संजू भारतीय महिला कबड्डी टीम तक पहुंचीं।

ईरान में एशियन चैंपियनशिप का अनुभव
मार्च 2025 में ईरान में आयोजित सीनियर महिला एशियन कबड्डी चैंपियनशिप में संजू भारतीय टीम का हिस्सा रहीं। भारतीय टीम ने प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। इस प्रतियोगिता में खेलने के बाद उनका आत्मविश्वास और अनुभव दोनों बढ़े। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन के चलते उन्हें उसी वर्ष महिला कबड्डी विश्व कप की भारतीय टीम में भी जगह मिली।
विश्व कप में 16 अंक और MVP का खिताब
संजू के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में 2025 का महिला कबड्डी विश्व कप शामिल है। बांग्लादेश में हुए टूर्नामेंट के फाइनल में भारत का सामना चीनी ताइपे से हुआ। भारत ने यह मुकाबला 35-28 से जीता।फाइनल में भारत के 35 अंकों में से 16 अंक अकेले संजू ने हासिल किए। उनकी रेडिंग ने मैच में भारतीय टीम को महत्वपूर्ण बढ़त दिलाने में भूमिका निभाई। टूर्नामेंट में लगातार प्रभावी प्रदर्शन के कारण उन्हें मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर यानी MVP चुना गया।
विश्व कप की जीत ने बदली पहचान
विश्व कप में MVP बनने के बाद संजू देवी की पहचान केवल छत्तीसगढ़ की खिलाड़ी तक सीमित नहीं रही। उनके प्रदर्शन ने उन्हें भारतीय महिला कबड्डी की प्रमुख खिलाड़ियों में जगह दिलाई। उनकी कहानी की खास बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने से पहले उन्होंने गांव, स्थानीय प्रतियोगिताओं और राज्य स्तर से अपना सफर शुरू किया। संसाधनों की सीमाओं के बीच लगातार अभ्यास करते हुए उन्होंने भारतीय टीम में अपनी जगह बनाई।
2026 एशियन गेम्स में भी भारतीय टीम का हिस्सा
संजू देवी को 2026 एशियन गेम्स के लिए भारतीय महिला कबड्डी टीम में भी जगह मिली। सितंबर 2026 में जापान के आइची-नागोया में हुए खेलों में भारत ने अपने अभियान की शुरुआत बांग्लादेश के खिलाफ 42-21 की जीत से की। इस मुकाबले में संजू ने भारतीय टीम के आक्रमण में अहम योगदान दिया। इस तरह विश्व कप 2025 की सफलता के बाद उनका अंतरराष्ट्रीय सफर लगातार आगे बढ़ा।
छत्तीसगढ़ सरकार ने किया सम्मान
विश्व कप में शानदार प्रदर्शन और भारत को खिताब दिलाने में योगदान के बाद संजू देवी को छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से 50 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि से सम्मानित किया गया। अप्रैल 2026 में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने उन्हें यह राशि प्रदान की। यह सम्मान संजू के खेल करियर में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि रहा। उनके प्रदर्शन को राज्य की खेल प्रतिभाओं के लिए भी एक उल्लेखनीय उदाहरण के तौर पर देखा गया।
संघर्ष से सफलता तक पहुंचने की कहानी
संजू देवी का सफर यह बताता है कि किसी खिलाड़ी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने में केवल प्रतिभा ही पर्याप्त नहीं होती। नियमित अभ्यास, सही प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं में लगातार प्रदर्शन और मानसिक मजबूती भी उतनी ही जरूरी होती है। गांव से शुरू हुआ उनका सफर पहले जिला और राज्य प्रतियोगिताओं तक पहुंचा, फिर विश्वविद्यालय स्तर की प्रतियोगिताओं के जरिए राष्ट्रीय पहचान मिली। इंडिया कैंप में प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम का रास्ता खुला और इसके बाद एशियन चैंपियनशिप तथा विश्व कप जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच मिले।
आने वाली पीढ़ी के लिए मिसाल
संजू देवी की कहानी उन बच्चों और युवाओं के लिए खास है, जो छोटे शहरों और गांवों से खेल की दुनिया में आगे बढ़ने का सपना देखते हैं। उनकी उपलब्धियां बताती हैं कि सीमित संसाधनों के बावजूद लगातार मेहनत और सही अवसर मिलने पर खिलाड़ी बड़े मंच तक पहुंच सकते हैं। कोरबा के एक छोटे से गांव से शुरू हुआ संजू देवी का सफर अब भारतीय कबड्डी टीम और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंच चुका है। विश्व कप MVP का खिताब, एशियन चैंपियनशिप का स्वर्ण और 2026 एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व—ये उपलब्धियां उनके अब तक के सफर को खास बनाती हैं।


